जयपुर। राजस्थान में दिव्यांग जनों के अधिकारों की बात जब भी होती है तो हेमंत भाई गोयल का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। गोयल पिछले लगभग 27 वर्षों से दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनका यह समर्पण केवल सामाजिक सरोकार नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत संवेदना से भी जुड़ा है, क्योंकि उनका 34 वर्षीय पुत्र शशांक जन्म से ही दिव्यांग है। यही कारण है कि उन्होंने इस कार्य को अपने जीवन का मिशन बना लिया। 1999 में जब उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया तो एक संकल्प लिया कि वे प्रोफेशनल समाज सेवा नहीं करेंगे। उन्होंने आज तक न सरकार से कोई आर्थिक सहायता ली, न किसी भामाशाह से सहयोग लिया और न ही दिव्यांग जनों से कोई शुल्क लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने दिव्यांग अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाया। गोयल की जिद, जज्बा,संघर्ष और हौंसला की बदौलत दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए अनेकों ऐसी योजनाएं और अधिकार सबसे पहले राजस्थान में लागू हुए और फिर अन्य प्रदेशों ने राजस्थान से प्रेरित होकर अपने अपने प्रदेशों में लागू किया। सन् 199...

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