Skip to main content

संगीता राजा : गृहिणी से सामाजिक कार्यकर्ता का सफर




जयपुर। 
संगीता राजा पालनहार फाउंडेशन की फाउंडर एवं सचिव हैं। पालनहार फाउंडेशन का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है- विशेष रूप से Child Abuse, Cybercrime, Malnutrition और किशोरियों में पीरियड्स को लेकर फैली भ्रांतियों के बारे में। संगीता राजा बताती हैं कि इसके लिए प्रमुख अभियान ‘अबोध’ है। साथ ही Women Mental Health पर भी काम करते हैं और समय-समय पर ब्लड डोनेशन कैंप व मेडिकल कैंप का आयोजन करते हैं। इस काम में जो सच्चा संतोष मिलता है, वह सिर्फ तब मिलता है जब आपकी कोशिशों से किसी व्यक्ति के जीवन में बदलाव आता है। उन्होंने बताया कि एक शिक्षिका के रूप में काम करना शुरुआत में सिर्फ एक आवश्यकता के कारण किया था। लेकिन जब वह एक मां और शिक्षिका दोनों की भूमिका निभा रही थी, तब उन्होंने यह महसूस किया कि कोई भी बच्चों से ‘गुड टच-बैड टच’ जैसी जरूरी बातों पर बात करना नहीं चाहता। इन विषयों पर चुप्पी है, जबकि ये वो बातें हैं जो हर बच्चे को पता होनी चाहिए। ऐसी ही बातों को लेकर एक बहुत बड़ी जागरूकता की कमी है जिसे वे नजरअंदाज नहीं कर सकीं। उन्हें लगा कि अगर बच्चों, अभिभावकों और समाज को सही समय पर सही जानकारी दी जाए तो हम एक ज्यादा सुरक्षित, सजग और संवेदनशील समाज की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

हेमंत भाई गोयल : बेटे की दिव्यांगता ने बनाया लाखों दिव्यांग जनों का पैरोकार

जयपुर।  राजस्थान में दिव्यांग जनों के अधिकारों की बात जब भी होती है तो हेमंत भाई गोयल का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।  गोयल पिछले लगभग 27 वर्षों से दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनका यह समर्पण केवल सामाजिक सरोकार नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत संवेदना से भी जुड़ा है, क्योंकि उनका 34 वर्षीय पुत्र शशांक जन्म से ही दिव्यांग है। यही कारण है कि उन्होंने इस कार्य को अपने जीवन का मिशन बना लिया। 1999 में जब उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया तो एक संकल्प लिया कि वे प्रोफेशनल समाज सेवा नहीं करेंगे। उन्होंने आज तक न सरकार से कोई आर्थिक सहायता ली, न किसी भामाशाह से सहयोग लिया और न ही दिव्यांग जनों से कोई शुल्क लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने दिव्यांग अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाया। गोयल की जिद, जज्बा,संघर्ष और हौंसला की बदौलत  दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए अनेकों ऐसी योजनाएं और अधिकार सबसे पहले राजस्थान में लागू हुए और फिर अन्य प्रदेशों ने राजस्थान से प्रेरित होकर अपने अपने प्रदेशों में लागू किया।  सन् 199...